Monday, 22 October 2018


रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय कुलपति डॉ मानसिंह परमार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नोटिस दिया है। यह नोटिस योग्य नहीं होने के बाद डॉ. परमार कुलपति बनाए जाने को लेकर लगाई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिया है।  डॉ. परमार की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में चुनौती दी है। प्रकरण में विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. मानसिंह के साथ-साथ यूजीसी को भी पक्षकार बनाया गया है।
डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि राज्य में कुलपति नियुक्ति के मामले में भेदभावपूर्वक नीति अपनाई जा रही है। बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति के दौरान डॉ सदानंद शाही के विरुद्व नियुक्ति की घोषणा के बाद प्राप्त शिकायत के आधार पर उनका पदग्रहण राजभवन से तत्काल रुकवा दिया गया था और उच्च स्तरीय जांच कमिटी गठित रिपोर्ट और विधि विभाग से परामर्श के आधार पर नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। जबकि समान आधार पर शिकायत प्राप्त होने के बाद भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में डॉ परमार को कुलपति बने रहने दिया गया। याचिकाकर्ता डॉ राकेश गुप्ता का कहना है कि कार्यवाही नहीं होने के कारण उन्हे उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में बेहद निराशााजनक वातावरण है, ऐसे व्यक्ति भी कुलपति पद के लिए नियुक्त कर दिए जाते हैं जो पद के लिए न्यूनतम योग्यता भी नहीं रखते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि छत्तीसगढ़ शासन और उच्च शिक्षा विभाग के पास आज तक डॉ परमार के अनुभव और शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि पत्रकारिता विश्वविद्दालय में इससे पहले भी नियुक्ति को लेकर विवाद हो चुका है। इस संबंध में लोक आयोग ने पुन: मेरिट लिस्ट जारी करने और पूर्व कुलपति के विरुध्द कार्यवाही की अनुशंसा भी की है।
सोशल मिडिया में चल रही खबरों के अनुसार जब इस संबंध में कुलपति डॉ. परमार से बात की तो उन्होंने इस मामले में चुप्पी साध ली।
याचिकाकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता की ओर कोर्ट में यह दलील दी गई है-
* डॉ परमार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित अनुभव न्युनतम 10 वर्षों तक प्रोफेसर के रूप में अनुभव नहीं रखते.
* विज्ञापन में पद के लिए जब आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए थे तो योग्य ना होने के बावजूद डॉ परमार ने आवेदन दाखिल किया
* चयन समिति ने डॉ परमार की योग्यता की जांच किए बिना ही उनका नाम कुलपति पद के लिए अनुशंसित कर दिया
* आवेदन और संलग्न दस्तावेजों में डॉ परमार ने कहीं भी अपने शैक्षणिक व अनुभव संबंधी प्रमाण पत्र प्रदर्शित नहीं किए हैं।

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रायपुर। कैबिनेट की बैठक मंगलवार को हुई सीएम डॉ रमन सिंह ने पत्रकारों को बताया कि अब नया रायपुर, बिलासपुर की युनिवर्सिटी, राजनांदगांव का मेडिकल कॉलेज स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम होंगे। रायपुर में एक्सप्रेस वे, ऑक्सीजोन का भी अटल नामकरण होगा। 27 जिलों में मूर्ति लगेगी। बच्चों की किताबों में अटल होंगे। विकास यात्रा फेस टू का नाम भी अटल जी पर होगा। 5 एकड़ में स्मारक बनेगा। 25 दिसंबर को बड़ा कार्यक्रम होगा, राज्योत्सव में उनके नाम अवॉर्ड दिया जाएगा।
इस फैसले पर तरह-तरह कि प्रतिक्रियांए आ रही है। सोशल मीडिया आयी खबरों के अनुसार सियासी और प्रशासनिक मामलों में बेबाक राय रखने वाले प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव रिटायर्ड आईएएस अधिकारी बीकेएस रे ने भी अपने मन की बात साझा की।
ब्यूरोक्रेसी-राजनीति पर पकड़ रखने वाले रे जो सोचते हैं उन्हीं के शब्दों में-
'अटल जी के घर मैं दो बार गया था अपनी लिखी किताबें भी दी थी, घर में 2 घंटे 20 मिनट तक बातें की। मैं उनकी विचारधारा से मैं प्रभावित हूं, मैं रोने लगा जब उनकी मौत की खबर आई। अटल जी के प्रति श्रद्धांजलि देना अलग है और राजनीतिक रोटी सेकना अलग।
काफी लोगों ने कहा कि अटल जी इतने दिन बीमार रहे, इतने बड़े-बड़े नेता जो आज अटज जी का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं कभी उनके बंगले जाने का कष्ट नहीं किया। सेकंडली जो हमारे यहां का राज्योत्सव होता है उसमें अटल जी का फोटो नाम नहीं होता कभी। बीजेपी के कैंपेन में भी अटल जी के नाम का जिक्र नहीं था, शायद लोगों में फीलिंग थी कि मोदी और अटल के संबंध ठीक नहीं।
श्रद्धांजलि देने की सीमा होती है और इस सीमा का जब अतिक्रमण होता तो लगता है कि राजनीतिक फायदे के चापलूसी के अलावा कुछ नहीं हो रहा। इसके प्रभाव विपरित पड़ते हैं। अटल जी अदभुत व्यक्ति रहे वैसा इंसान दोबारा आएगा मुझे संदेह है।
नेता जो भजन गा रहे हैं मूर्ति लाएंगे, ये होगा वो होगा, अटल जी क्या ये सब चाहते थे, उनकी आत्मा को पीड़़ा होगी अगर ऐसा अपव्यव होगा उनके नाम पर तो दायरे में रहकर श्रद्धांजलि देना ठीक है, लोग इसे स्वीकार करेंगे। दो चार लोगों ने कहा कि अटल जी का सहारा लेकर ये कैंपेन चलाना चाह रहे हैं। मोदी का प्रभाव घट रहा है बीजेपी में भय है कि दोबारा मोदी का नाम लेकर शायद ही वोट मिले। तो अटल जी का नाम लेकर आने वाले चुनावों में  प्रोजेक्ट कर रहे हैं जैसे दीनदयाल को किया। खैर दायरे में रह कर अटल जी को याद करें तो अच्छा होगा।
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संवेदनशीलता का ऐसा ढ़ोंग करना शर्मनाक एवं सामाजिक अपराध है
स्व. अटलजी के नाम पर राजनीति से, क्षुब्ध और व्यथित हूं: करुणा शुक्ला
रायपुर, 23 अगस्त। जब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का अस्थि कलश रायपुर पहुंचा और श्रद्धांजलि सभा रखी गई तब जो कुछ हुआ, उस संबंध में सोशल मिडिया में वायरल हो रही विडियो देखकर भारतरत्न एवं पूर्व प्रधान स्व. अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर भाजपा की संवेदनशीलता एवं गंभीरता के ढकोसले को देखकर लोग ना केवल आश्चर्य हो रहे हैं अपितु बाजपेयी जी के सच्चे अनुयायी शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि जिस श्रद्धांजलि सभा के मंच पर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष के अलावा संगठन और सत्ता से जुड़े लोगों का मजमा लगा हो वहां प्रदेश सरकार के दो केबिनेट मंत्री अजय चन्द्राकर और बृजमोहन अग्रवाल द्वारा ताली ठोककर ठहाके लगाना ना केवल अनुचित है बल्कि श्रद्वांजलि सभा में ऐसी करसूत निंदनीय के साथ उस परिवार के प्रति ओछी संवेदना को प्रदर्शित करता है। जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने उक्त दोनो मंत्रियों को ठहाके लगाते देखा तो उन्हें चुप कराया। इसके बाद मंत्री श्री चंद्राकर अपने चेहरे पर गंभीरता दिखाने की नौटंकी करने लगे।
इस संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी व भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं करुणा शुक्ला ने कहा कि वह अटलजी की मृत्यु के बाद भाजपा की राजनीति से क्षुब्ध हैं। भाजपा जिस तरह से उनके नाम पर राजनीति कर रही है, उससे व्यथित भी हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले दस साल से अटल बिहारी वाजपेयी को भाजपा के परिदृश्य से पूरी तरह से गायब कर दिया गया था। इस दौरान जिन राज्यों में चुनाव हुए, वहां अटलजी का नाम लेना तो दूर, किसी पोस्टर या बैनर तक में उनकी तस्वीर नहीं लगाई गई। इस साल कुछ राज्यों में चुनाव होना है और भाजपा की नैय्या डूबती दिख रही है तो अचानक भाजपा को अटल  बिहारी वाजपेयी तिनके का सहारा दिखने लगे हैं।
शुक्ला का कहना है कि नया रायपुर से लेकर विश्वविद्यालय का नाम अटल बिहारी वाजपेयी रखने का फैसला राज्य मंत्रिमंडल ने लिया है, इसके पहले दस साल में कितनी बार राज्य सरकार ने अटल को याद किया, यह बताए। प्रदेश की जनता आडंबर को समझ रही है। अटलजी की प्रतिमाएं लगाने का कारण सिर्फ और सिर्फ वोट की राजनीति है। शुक्ला का यह भी कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी के जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी तक कितने आत्मीय संबंध रहे हैं, यह इतिहास में दर्ज है, लेकिन भाजपा मानवीय संबंधों का सम्मान करना भूल चुकी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता का पार्टी में हो रहा अपमान है।
अटल जी की शोकसभा में मंत्रियों की हंसी ठिठोली, यह कैसा सम्मान- रोहित
आम आदमी पार्टी के लोकसभा अध्यक्ष व जगदलपुर विधानसभा प्रत्याशी रोहित सिंह आर्य ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया है। श्री आर्य ने कहा कि भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी बाजपेयी के देहांत से सारा देश शोकाकुल है। पक्ष-विपक्ष सहित ऐसा कोई वर्ग नही होगा जिसने अटल जी के देहांत पर संवेदनाएं व्यक्त ना की हो, पर भाजपा ने जिस तरह अस्थि कलश यात्रा के जरिये राजनीतिकह्य हित साधने की कोशिश कर रही है वह बेहद निंदनीय व शर्मनाक है। यदि भाजपा और उनके नेताओं में अटल जी की मृत्य को लेकर जरा भी संवेदनाएं होती तो अस्थि कलश के साथ हस्ते मुस्कुराते शेल्फी फ़ोटो सोशल मीडिया में वाइरल नही करते। सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो तब देखने को मिला जब दिल्ली से रायपुर पहुंचे अस्थि कलश की प्रार्थना सभा मे छत्तीसगढ़ के मंत्रीगण हंसी ठिठोली करते नजर आए। यदि भाजपा में थोड़ी भी शर्म बाकी है तो  भारतरत्न अटल जी के अपमान करने वाले मंत्रियों को बर्खास्त कर उन पर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने विज्ञप्ति में कहा है कि अटल जी का अचानक गुणगान सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। श्री आर्य ने आगे कहा कि विगत 9 वर्षों से अटल जी अस्वस्थ थे तब अटल जी के स्वार्थी भक्त भाजपाईयों में से किसी को उनकी महानता दिखाई क्यों नहीं दी। जब हमारे देश में छोटी सी छीख आने पर भी महान पार्टी के नेतागण विदेश दौड़ पड़ते हैं तो ऐसे में इन 9 सालों में अटल जी को एक भी बार विदेश भेजकर इलाज क्यों नहीं करवाया गया। पिछले सभी लोकसभा विधानसभा चुनाव में भी अटल जी को पूरी तरह भुला दिया गया था। विज्ञप्ति में कहा है कि भाजपा का कमान जब से मोदी जी ने संभाला है तब से अटल जी की तस्वीर पार्टी के तमाम प्रचार सामग्रियों से विलुप्त कर दिया गया था। आज अटल जी का गुणगान मोदी जी और उनके टीम की विफलताओं के वजह से खिसकते वोट बैंक और भाजपा की डूबती नैया को बचाने के लिए किया जा रहा है  जो कि असफल प्रयास मात्र ही है। आज अटल जी के अस्थि कलश को पूरे देश में मजाक बनने वाले लोग हैं जो अटल जी द्वारा गुजरात दंगों पर राजधर्म का पालन करने की सलाह देने परिणाम स्वरूप सत्ता मिलते ही उन्हें भाजपा से षडयंत्र के तहत विलुप्त कर दिया गया था और साथ आडवाणी जी व मुरली मनोहर जोशी जी को भी अघोषित तौर पर आजीवन पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
श्री आर्य ने कहा कि बड़ी विडंबना की बात है कि भाजपा के संस्थापक को अपने ही घर में अपमान और उपेक्षापूर्ण जीवन जीने के छोड़ दिया गया और मृत्यु के उपरांत गुणगान कर राजनीतिक ढोंग की जा रही है। बगुला भक्ति का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता।

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रायपुर, 25 अगस्त। रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा भारत सरकार ने मंजूर कर लिया है। जब तक नये कलेक्टर की पदस्थापना नहीं की जाती तब तक उनके जगह फिलहाल जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक सोनी रायपुर कलेक्टर का प्रभार संभालेंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने आज शाम को आदेश जारी कर दिया है।
राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव अजय सिंह ने आज आदेश जारी किया है। आदेशानुसार भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग नई दिल्ली ने ओमप्रकाश चौधरी के त्याग पत्र को स्वीकृत किया है। त्याग पत्र स्वीकृत होने के साथ श्री चौधरी रायपुर कलेक्टर के प्रभार से तत्काल कार्यमुक्त हो गए है। आदेश में यह भी कहा गया है कि रायपुर में नियमित कलेक्टर की पदस्थापना तक जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक सोनी अपने कर्तव्यों के साथ-साथ रायपुर कलेक्टर का प्रभार भी संभालेंगे। ज्ञात हो कि दीपक सोनी 2011 के आईएएस है।
अपनी माटी की सेवा के लिए आईएएस से त्यागपत्र दिया हूं: ओपी चौधरी
रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने आईएएस पद से इस्तीफे की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिये अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा है कि वो अपना वक्त अपनी माटी की सेवा के लिए देना चाहते हैं। उन्होंने लिखा है कि मेरे बायंग गांव की गलियों से निकलकर रायपुर के कलेक्टर बनने तक के 13 साल के सफर में जिंदगी ने मुझे अनेकों चुनौतीपूर्ण अवसर दिये। इस सफर में हजारों लोगों ने मुझे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से साथ दिया, उन्हें शुक्रिया अदा करने के लिये हिन्दी शब्दावली का कोई भी शब्द कम पड़ेगा। मैं अब अपनी माटी और अपने लोगों की बेहतरी के लिये अपना पूरा समय देना चाहता हुँ। इसलिये मैंने आईएएस से त्यागपत्र दे दिया है।
भाजपा की टिकट पर लड़ेंगे विधानसभा चुनाव
श्री चौधरी जांजगीर जिले के कलेक्टर रह चुके है और वहां उनके कार्यकाल में कराये गये कामों से वहां की जनता उनसे काफी खुश और पसंद करती है। वहां की जनता का उनके प्रति प्यार, विश्वास को देखते हुए श्री चौधरी जांजगीर या फिर खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे की ज्यादा संभावना है। हांलाकि ओपी चौधरी ने इन खबरों की पुष्टि अब तक नही की है।
खरसिया से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल विधायक हैं। नंदकुमार पटेल के झीरम घाटी में हुए नक्सल हमले में निधन के बाद उनके पुत्र उमेश पटेल ने खरसिया विधानसभा से भारी भरकम मतों से जीत दर्ज की थी। खरसिया विधानसभा में अघरिया जाति बेहद ताकतवर है। गौरतलब है कि उमेश पटेल भी इसी अघरिया जाति से ताल्लुक रखते हैं। चूंकि ओपी चौधरी भी इसी अघरिया जाति से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए मिल रही खबरों के मुताबिक भाजपा श्री चौधरी को खरसिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक उमेश पटेल के खिलाफ उतारने की तैयारी में है।

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