Monday, 22 October 2018

निर्माणाधीन मेट्रो स्टेशन पर तेजाब से भरा कैन गिरा, एक की मौत, पांच झुलसे
नई दिल्ली, 04 अक्टूबर । दिल्ली के निर्माणाधीन मेट्रो स्टेशन पर बुधवार रात तेजाब से भर एक कैन गिर जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए. सभी को गंभीर हालत में गुरुतेग बहादुर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.
जानकारी के अनुसार यूपी की सीमा से लगे शिव विहार मेट्रो स्टेशन पर काम चल रहा है. बुधवार को मेट्रो के निर्माणाधीन स्टेशन की साफ सफाई के लिए तेजाब के कैन मंगाए गए थे. बताया जाता है कि तेजाब से भरा एक कैन स्टेशन से नीचे सड़क पर गिर पड़ा. इस हादसे में छह लोग गंभीर रूप से झुलस गए. गंभीर रूप से झुलसे लोगों को तुरंत गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक युवक की मौत हो गई. युवक की पहचान 35 वर्षीय अमित कुमार के रूप में हुई है. अमित इलाके में ही जौहरीपुर में कॉस्मैटिक की दुकान चलाता है. बताया जाता है कि हादसे के समय वह दुकान छोड़कर कुछ लेने निकला था, उसी समय यह हादसा हो गया.

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पुलिस ने साक्ष्यों की प्रतियां शशि थरूर को सौंपी
सुनंदा पुष्कर केस
नई दिल्ली, 04 अक्टूबर । सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया कि उनकी ओर से मामले से जुड़े दस्तावेज कांग्रेस नेता शिश थरूर को सौंप दिए गए हैं. कोर्ट में उन्होंने बताया कि इस मामले में 158 गवाह मौजूद हैं और 97 गवाहों के 161 बयान दर्ज कर लिए गए हैं. सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में सभी दस्तावेज सौंप दिए गए हैं. इस मामले में शशि थरूर के वकील विकास पहवा ने कहा था उन्हें अभी तक दिल्ली पुलिस की ओर से मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए टाल दी है.
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 3000 पन्नों की अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि शशि थरूर ने सुनंदा पुष्कर के साथ काफी हिंसक व निर्दयतापूर्ण व्यवहार किया. बता दें कि चार साल पहले सुनंदा पुष्कर दिल्ली के एक होटल में रहस्यमयी परिस्थितियों में मरी हुई पाई गईं थी. मामले में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने आईपीसी की धारा 498 ए (पति या उसके संबंधियों द्वारा किसी महिला के साथ निर्दयतापूर्ण व्यवहार) व 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज किया गया था.

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सात रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजा गया
सुको ने दखल से किया था इनकार
नई दिल्ली, 04 अक्टूबर । 7 रोहिंग्या मुसलमानों को गुरुवार को मणिपुर के मोरेह बॉर्डर से वापिस म्यांमार भेज दिया गया। सीनियर वकील प्रशांत भूषण के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के इससे इनकार करने के कुछ घंटे बाद ही 7 रोहिंग्याओं को भारत से बाहर भेजा गया। भूषण ने दलील दी थी कि म्यांमार में इन्हें उत्पीडऩ का सामना करना पड़ सकता है।
जिन रोहिंग्याओं को म्यांमार की अथॉरिटी को मोरेह बॉर्डर पर सौंपा गया है उनकी पहचान मोहम्मद जमाल, मुकबुल खान, साबिर अहमद, मो. सलाम, जमाल हुसैन, मो. रहिमुद्दीन और मोहम्मद युनुस के तौर पर हुई है। म्यामांर द्वारा इन सभी की पहचान वहां के निवासी के तौर पर की गई है।
म्यांमार सरकार ने अगस्त 2018 में सात रोहिंग्याओं को एक बार यात्रा के लिए दस्तावेज के रूप में उनके निर्वासन को सक्षम करने और म्यांमार लौटने के लिए पहचान प्रमाणपत्र जारी किया था। असम पुलिस ने बुधवार सुबह उन सातों को उनके जरूरी दस्तावेजों के साथ सिलचर डिटेंशन सेंटर से मोरेह बॉर्डर पहुंचाया। जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया तो इन्हें म्यामांर अथॉरिटी को सौंप दिया गया।
बता दें कि प्रशांत भूषण ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट को रोहिंग्याओं के जीवन के अधिकार की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। इसपर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी पता है और किसी को इसे याद दिलाने की जरूरत नहीं।
प्रशांत भूषण की याचिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। केंद्र सरकार ने बेंच को बताया कि ये 7 रोहिंग्या 2012 में भारत में घुसे थे और इन्हें फॉरेन ऐक्ट के तहत दोषी पाया गया था।
केंद्र की तरफ से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने कहा कि म्यांमार ने इन रोहिंग्याओं को अपना नागरिक मान लिया है। साथ ही वह उन्हें वापस लेने के लिए भी तैयार है। एएसजी ने कहा कि ऐसे में कोई वजह नहीं है कि इन रोहिंग्याओं को उनके देश जाने से रोका जाए। सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्याओं को जबरन वापस भेजा जा रहा है।
प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त करते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अधिकारों को रोहिंग्याओं की इच्छा जानने को कहे। भूषण ने कहा इससे यह पता लगाया जाए कि क्या रोहिंग्या वहां जाएंगें जहां उनका भयानक नरसंहार हुआ था। हालांकि चीफ जस्टिस गोगोई की बेंच ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका खारिज होने के बाद प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को रोहिंग्याओं के जीवन के अधिकार की रक्षा करने के लिए अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। इसपर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम हम जीवन के अधिकार के संबंध में अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह से अवगत हैं और किसी को इसे याद दिलाने की जरूरत नहीं।

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दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन
एस-400 मिसाइल डिफेंस डील पर लग सकती है मुहर
नई दिल्ली, 04 अक्टूबर । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर दो दिन के भारत दौरे के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत किया। पुतिन के इस दौरे को दोनों देशों के लिए रणनीतिक संबंधों के हिसाब से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच औपचारिक मीटिंग होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच एस-400 मिसाइल डिफेंस डील हो सकती है।
पुतिन के दौरे का असर अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। नई दिल्ली को इस बात की जानकारी है कि रूस के साथ डील के चलते उसे अमेरिकी प्रतिबंधों को सामना करना पड़ा सकता है। हाई-लेवल डेलिगेशन संग आ रहे व्लादिमीर पुतिन के साथ विदेश मंत्री सर्जेइ लावरोव भी होंगे। गुरुवार की शाम को पुतिन पीएम मोदी के साथ डिनर कर सकते हैं।
शुक्रवार को दोनों देशों के बीच औपचारिक मीटिंग के बाद कई अहम समझौते किए जा सकते हैं। डिफेंस अग्रीमेंट्स के साथ ही भारत और रूस के बीच स्पेस को-ऑपरेशन मेकेनिज्म पर भी करार हो सकता है। पीएम मोदी की ओर से 2022 में चांद में मानव को भेजने के मिशन के ऐलान के बाद यह करार महत्वपूर्ण होगा।
इस बीच अधिकारी अमेरिका से बातचीत करने में जुटे हैं ताकि एस-400 डील और भारत-रूस संबंधों के लिए उसे तैयार किया जा सके। हाल ही में 2+2 टॉक के दौरान मैटिस और पॉम्पियो ने तकरीबन एक घंटे तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से इस संबंध में बात की थी।
रक्षा जानकारों की मानें तो अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से यह एयर डिफेंस सिस्टम न खरीदे। जानकारों के मुताबिक यूएस की चिंता इस बात को लेकर है कि एस-400 का इस्तेमाल अमेरिकी फाइटर जेट्स की स्टील्थ (गुप्त) क्षमताओं को टेस्ट करने के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं, माना जा रहा है कि इस सिस्टम से भारत को अमेरिकी जेट्स का डेटा मिल सकता है। अमेरिका को यह डर भी सता रहा है कि यह डेटा रूस या दुश्मन देश को लीक किया जा सकता है।

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