मध्यप्रदेश

नियुक्ति की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे चयनित पटवारी, पुलिस ने वाहन में भरकर शहर से दूर छोड़ा

भोपाल। नियुक्ति दिए जाने की मांग को लेकर राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में बैठे चयनित पटवारी के साथ पुलिस ने रविवार दोपहर अपराधियों जैसा सलूक किया है। शांतिपूर्ण धरना दे रहे चयनित पटवारियों को पुलिसकर्मियों ने लात-घूसों से पीटते हुए पुलिस वाहनों में भरकर शहर के बाहर छोड़ दिया है। बड़ी संख्या में चयनित पटवारियों के बिना अनुमति धरना देने को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। चयनित पटवारियों को धक्का देते, पैर से मारते हुए पुलिसकर्मियों के वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने पुलिस की इस कार्रवाई को बर्बरता बताते हुए शिवराज सरकार को जमकर घेरा है।

कानून-व्यवस्था बनाने धरने से हटाया

रविवार को प्रदेश भर के करीब पांच सौ से अधिक चयनित पटवारियों ने अलग-अलग वाहनों और रास्ते से राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में एकत्रित हो गए। सभी चयनित पटवारी नियुक्ति देने की मांग करते हुए धरना देने लगे। हालांकि चयनित पटवारियों ने धरना देने के लिए पुलिस-प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि चयनित पटवारियों ने धरना-प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं ली थी। ऐसे में शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें पुलिस वाहनों में बैठाकर दूसरे स्थान पर ले जाया गया है।

केके मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह शिवराज सरकार का असली चेहरा

कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह शिवराज सरकार का असली चेहरा है। मिश्रा ने कहा कि शिवराज सरकार ने पटवारी भर्ती परीक्षा में घोटाला कर लिया। न्याय की मांग करने वाले चयनित पटवारियों के साथ पुलिस अपराधियों जैसा सलूक कर रही है।

दरअसल कर्मचारी चयन मंडल द्वारा पटवारी की भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। ग्वालियर जिले में भाजपा विधायक संजीव कुशवाह के कॉलेज को भी परीक्षा केंद्र बनाया गया था। उक्त परीक्षा केंद्र में धांधली करने के आरोप लगे थे। परीक्षा परिणाम जारी हुआ तो वहां एक ही परीक्षा केंद्र सेे पटवारी भर्ती परीक्षा के टॉप टेन में से टॉप-9 अभ्यर्थी निकले। इसके बाद भर्ती परीक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त परीक्षा केंद्र की परीक्षा की जांच कराने के निर्देश देने के साथ पटवारियों की चयन पक्रिया जांच पूरी होने तक रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीया की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया गया है, जो पटवारी भर्ती परीक्षा के मामले की जांच कर रहा है। लेकिन पटवारी भर्ती परीक्षा में चयनित अभ्यर्थी उप निरीक्षक और शिक्षक पात्रता परीक्षा-2020 की तरह जांच के समानांतरण नियुक्ति प्रक्रिया चलाने की मांग कर रहे हैं।

इधर मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में चयनित पटवारियों को जल्द से जल्द नियुक्ति देने की मांग की है। ज्ञात हो कि सितम्बर 2023 में पटवारी चयन परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों कि ग्रुप-2 सब ग्रुप- 4 पटवारी भर्ती परीक्षा में लगभग 8,600 अभ्यर्थी चयनित होकर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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