सुप्रीम कोर्ट से कवासी लखमा को जमानत, बीजापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी

आदिवासी समाज ने जमानत की शर्तों पर जताई आपत्ति
बीजापुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लखमा के समर्थक बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कवासी लखमा जनवरी 2025 से रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध थे।
जमानत की खबर मिलते ही बीजापुर जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक जश्न मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने फटाके फोड़े और मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को सत्य की जीत बताते हुए कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।” नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखा गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका में आम जनता के विश्वास को और मजबूत करता है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि आने वाले समय में सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी और कवासी लखमा निर्दोष साबित होंगे।

हालांकि, इस पूरे मामले में आदिवासी समाज की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। आदिवासी संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों ने जमानत की कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जमानत के तहत कवासी लखमा को उनके गृह क्षेत्र और प्रदेश की सीमा से बाहर रहने की शर्त लगाई गई है, जो उनके नैसर्गिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
आदिवासी समाज का आरोप है कि एक आदिवासी नेता होने के कारण कवासी लखमा को अतिरिक्त मानसिक और सामाजिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। समाज के लोगों का कहना है कि किसी व्यक्ति को उसके जन्मस्थान और सामाजिक परिवेश से अलग करना, विशेषकर एक जनप्रतिनिधि को, न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

इस दौरान बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने द्वेष और षड्यंत्र के तहत जनप्रिय नेता कवासी लखमा को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने का काम किया। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि न्याय अंततः सत्य के पक्ष में खड़ा होता है। विधायक मंडावी ने विश्वास जताया कि कवासी लखमा बहुत जल्द जनता के बीच होंगे और पहले से अधिक मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं जमानत की शर्तों को लेकर उठे सवालों ने इस मुद्दे को सामाजिक और संवैधानिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।




