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कांग्रेस के बाद अब CPI ने भी ग्राम सभा की अनदेखी का लगाया आरोप

अनुसूचित क्षेत्र में बिना ग्राम सभा अनुमति कोरंडम खदान को पर्यावरण स्वीकृति, आदिवासी अधिकारों के हनन का दावा

बीजापुर(हिन्दसत)। बीजापुर जिले के भोपालपटनम क्षेत्र अंतर्गत कुचनूर स्थित कोरंडम खदान को पर्यावरण स्वीकृति दिए जाने के मामले में अब राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस के बाद अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने भी सरकार पर ग्राम सभा की अनदेखी और आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।

भाकपा (CPI) के जिला सचिव कामरेड कमलेश झाड़ी ने बयान जारी कर कहा कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र है, इसके बावजूद न तो ग्राम सभा की अनुमति ली गई और न ही ग्रामीणों से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि तानाशाही रवैया अपनाते हुए आदिवासी क्षेत्र से बेशकीमती खनिज निकालने का फैसला किया गया है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

कमलेश झाड़ी ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की विष्णुदेव साय सरकार बस्तर के जल-जंगल-जमीन और खनिज संसाधनों को कार्पोरेट कंपनियों के हवाले करने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि यह आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

भाकपा जिला सचिव ने यह भी कहा कि बीते कई वर्षों से सरकारें नक्सल उन्मूलन के नाम पर गरीब आदिवासियों को विस्थापन और पलायन के लिए मजबूर करती रही हैं, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों की बराबर भूमिका रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी हालत में बस्तर को लूटने नहीं दिया जाएगा और भाकपा आदिवासी जनता के साथ मिलकर जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करेगी।

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