बीजापुर में मुफ्त सरकारी दवाइयों को जलाने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बासागुड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे दवाइयों का जखीरा जलाए जाने की चर्चा, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
बीजापुर (हिन्दसत)। जिले के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें गरीब मरीजों के इलाज के लिए भेजी गई सरकारी दवाइयों को कथित रूप से जलाए जाने की बात सामने आई है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार उसूर विकासखंड के अंतर्गत बासागुड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे मंगलवार को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) के माध्यम से आई दवाइयों का बड़ा जखीरा जलाया जाता देखा गया। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले कुछ समय से दवाइयों को नष्ट किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जबकि अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले कई मरीजों को पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पातीं।
सूत्रों का कहना है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त उपचार व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर्स या अन्य स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं और मेडिकल स्टोर्स से ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कमजोर होने के कारण इस तरह की गतिविधियां बढ़ने की बात कही जा रही है।
इसी बीच यह भी चर्चा है कि हाल ही में नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) की टीम ने बासागुड़ा और तर्रेम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद दवाइयों को नष्ट किए जाने की घटनाएं सामने आने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है, हालांकि इस संबंध में विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि सरकारी दवाइयों को नष्ट किया जा रहा है तो इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़ भी माना जाएगा।
फिलहाल मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।


