धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 पर विवाद: प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस ने जताई आपत्ति

अलायंस का आरोप— धार्मिक स्वतंत्रता की आड़ में ईसाई समुदाय को बनाया जा रहा निशाना
रायपुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस (PCA) ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया है।
अलायंस के समन्वयक रेव. भूपेंद्र खोरा ने कहा कि यह बिल धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने के बजाय ईसाई समुदाय को निशाना बनाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि पहले से लागू 1968 के कानून का भी कई बार गलत इस्तेमाल हुआ है, ऐसे में नया और अधिक कठोर कानून स्थिति को और जटिल बना सकता है।
PCA का दावा है कि पिछले वर्षों में पादरियों और ईसाई समाज के लोगों के खिलाफ जबरन धर्मांतरण के आरोप में कई मामले दर्ज किए गए, लेकिन अधिकांश मामलों में सजा नहीं हो सकी। इससे यह संकेत मिलता है कि इन प्रावधानों का उपयोग दबाव बनाने के लिए किया जाता है।
अलायंस ने विधेयक के उन प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को सूचना देना और अनुमति लेना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
इसके साथ ही ‘प्रलोभन’ और ‘अनुचित प्रभाव’ जैसे शब्दों को अस्पष्ट बताते हुए PCA ने इनके संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई है। उनका कहना है कि पहले भी इन आधारों पर धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों को लेकर विवाद खड़े किए गए हैं।
विधेयक में कड़े दंड प्रावधानों को लेकर भी अलायंस ने चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, इससे समाज में भय का वातावरण बन सकता है।
“घर वापसी” को विधेयक में अलग श्रेणी में रखने पर भी PCA ने सवाल उठाए हैं और इसे भेदभावपूर्ण बताया है।
अलायंस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस तरह के मुद्दों के माध्यम से बेरोजगारी, महंगाई और अन्य जनसमस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
PCA ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को लेकर न्यायालय का रुख करेगा और राज्यभर में जागरूकता अभियान भी चलाएगा।


