पोर्टा केबिन मामला: जांच में सामने आई सच्चाई, खबरें निकलीं आंशिक रूप से भ्रामक

सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां उजागर, समाज ने प्रशासन से की सुधार की मांग
बीजापुर (हिन्दसत)। गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने संबंधी चर्चित मामले में सर्व आदिवासी समाज द्वारा गठित जांच दल ने अपनी अंतिम रिपोर्ट कलेक्टर बीजापुर को सौंप दी है। जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया माध्यमों में प्रसारित खबरें पूर्णतः सत्य नहीं थीं, बल्कि आंशिक (अर्ध-सत्य) जानकारी पर आधारित थीं।

संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के निर्देशन में 19 मार्च 2026 को गठित 9 सदस्यीय जांच दल ने स्थल निरीक्षण के साथ-साथ संबंधित छात्राओं, उनके परिजनों एवं छात्रावास स्टाफ से चर्चा कर तथ्यों का संकलन किया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक छात्रा सितंबर 2025 में अवकाश पर अपने घर गई थी और इसके बाद वह छात्रावास वापस नहीं लौटी। वहीं, अन्य दो छात्राएं जुलाई 2025 से ही विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं थीं तथा वे अपने मंगनी किए गए युवकों के साथ रह रही थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित छात्राओं की मंगनी लगभग 3-4 वर्ष पूर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत हो चुकी थी।
हालांकि, जांच दल ने आवासीय विद्यालय में सुरक्षा एवं प्रबंधन से जुड़ी गंभीर खामियों को भी उजागर किया है। छात्रावास में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, लंबे समय से बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे तथा छात्राओं में नैतिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा की कमी प्रमुख रूप से सामने आई है।
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने कहा, “भ्रामक खबरों से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। जांच में वास्तविक स्थिति अलग पाई गई है, इसलिए केवल सत्य एवं प्रमाणित जानकारी का ही प्रसार किया जाना चाहिए।”
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए, सीसीटीवी कैमरों को तत्काल चालू किया जाए तथा छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।


