बस्तर के विस्थापितों की घर वापसी से स्थानीय भर्ती तक—सर्व आदिवासी समाज ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

गोट्टी कोया पुनर्वास, DMFT संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, स्थानीय भर्ती, जेलों में बंद आदिवासियों की समीक्षा और बस्तर शांति समिति गठन की मांग
बीजापुर (हिन्दसत)। सर्व आदिवासी समाज जिला बीजापुर ने विभिन्न जनजातीय मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सलवा जुडूम के दौरान आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में विस्थापित हुए आदिवासी परिवारों की ससम्मान घर वापसी, स्वास्थ्य विभाग में डीएमएफटी मद से कार्यरत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, बस्तर-सरगुजा संभाग में स्थानीय भर्ती व्यवस्था बहाल करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें प्रमुखता से उठाई गई हैं।
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने बताया कि दक्षिण बस्तर के हजारों आदिवासी परिवार सलवा जुडूम और आंतरिक संघर्ष के दौरान अपना पैतृक गांव छोड़कर आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बस गए थे। वर्तमान में ये परिवार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं और अपने गांव लौटना चाहते हैं। संगठन ने इन परिवारों का सर्वे कर सुरक्षित घर वापसी, पुनर्वास, भूमि आवंटन तथा वन अधिकार पत्र प्रदान करने की मांग की है, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने क्षेत्र में पुनः बस सकें।
संगठन ने स्वास्थ्य विभाग में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) मद से कार्यरत संविदा कर्मियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्र में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन सहित कई कर्मचारी वर्षों से कम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं, जो “समान कार्य-समान वेतन” के सिद्धांत के विपरीत है। सर्व आदिवासी समाज ने संविदा भर्ती समाप्त कर नियमित नियुक्ति करने तथा वर्तमान कर्मियों का अनुभव के आधार पर नियमितीकरण करने की मांग की है।
इसके साथ ही बस्तर एवं सरगुजा संभाग में तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर स्थानीय निवासियों की शत-प्रतिशत भर्ती व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग भी की गई। ज्ञापन में कहा गया कि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय भाषा, संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी रोक लगेगी।
संगठन ने “नक्सलवाद मुक्त बस्तर” की घोषणा के बाद जेलों में बंद विचाराधीन आदिवासियों के मामलों की विधिक समीक्षा कर निर्दोषों की रिहाई हेतु विशेष नीति बनाने की मांग भी रखी। इसके लिए उच्चस्तरीय “बस्तर शांति समीक्षा समिति” गठन, विधिक सहायता उपलब्ध कराने और रिहा व्यक्तियों के पुनर्स्थापन हेतु योजना लागू करने का सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा बस्तर में चार दशकों से रहे नक्सलवाद के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संगठन का कहना है कि स्थायी शांति स्थापित करने के लिए समस्या की जड़ों का वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है, जिससे भविष्य की नीति निर्धारण में मदद मिल सके।
सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। ज्ञापन तहसीलदार बीजापुर पंचराम सलामे को सौंपा गया। इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी, शंकर कुड़ियाम, कमलेश पैंकरा, सुशील हेमला, अमित कोरसा, कामेश्वर दुब्बा, मासा राम तेलाम, कार्तिक मांडवी, जितेंद्र हेमला, मानकुराम मरकाम, सुरेश कड़ती, हरिराम, मनीराम, लच्छिंदर हेमला, लक्ष्मण कड़ती, सतीश मांडवी, बचलू वाचम, पाकलु तेलम सहित बड़ी संख्या में समाज प्रमुख मौजूद रहे।



