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जैतालुर मंडई: कोदई माता मेला आज, तैयारियां पूरी

घी, दूध और मूड़ी माली तालाब के जल से माता का स्नान-श्रृंगार, आज देवताओं का मेल-मिलाप

बीजापुर (हिन्दसत)। इलाके के प्रसिद्ध कोदई माता जैतालुर मेला की शुरुआत परंपरागत जगार रस्म के साथ हो चुकी है। सोमवार को माता के श्रृंगार और पूजन के बाद मेले की औपचारिक शुरुआत हुई, जबकि मंगलवार को देवताओं के मेल-मिलाप, श्रद्धालुओं द्वारा बलि एवं बाहर से आए देवी-देवताओं की विदाई के साथ मेला देर शाम तक संपन्न होगा।

कोदई माता जैतालुर मेला के साथ ही क्षेत्र में मेला–मड़ई के दौर की शुरुआत मानी जाती है। मेले को लेकर ग्राम पंचायत द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

हिन्दी कैलेंडर के कारण एक साल में दो बार जैतालुर मेला

जैतालुर मेला के लिए जनवरी 2025 में स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था, जबकि हिन्दी पंचांग के अनुसार इस वर्ष मेला 30 दिसंबर 2025 को पड़ रहा है। इसी कारण वर्ष 2025 में जैतालुर मेला दो बार आयोजित हो रहा है। पंचांग आधारित तिथि परिवर्तन के चलते यह स्थिति बनी है, जिससे क्षेत्र में धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

ग्राम सरपंच अनीता कक्केम ने बताया कि इस वर्ष बच्चों के मनोरंजन के लिए छोटे झूले लगाए गए हैं। बाजार स्थल पर दुकानदारों को पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर स्थान आवंटन किया गया है। बर्तन, कपड़े, आभूषण और लोहे के औजारों के लिए अलग-अलग पंक्तियों में दुकानें लगाई गई हैं। रात्रि प्रकाश व्यवस्था के लिए हैलोजन बल्ब लगाए गए हैं। पेयजल के लिए हैंडपंप के साथ पंचायत एवं नगर पालिका बीजापुर से पानी टैंकर की व्यवस्था की गई है।

ग्राम पटेल प्रभुनाथ भोयर ने बताया कि जगार रस्म संपन्न हो चुकी है। इस दौरान कोदई माता को दूध, घी और मूड़ी माली तालाब के जल से स्नान कराया गया। पीड़ा पटानी रस्म के माध्यम से गांव की बुराइयों और अपशगुन को ग्राम सीमा से बाहर किया गया।

ग्राम प्रमुखों के अनुसार, शनिवार को सेमी पंडुम के साथ पीड़ा पटानी संपन्न हुई। इसके बाद से सेमी को सब्जी और दाल के रूप में उपयोग, झाड़ू कटाई और पत्ता तोड़ने की परंपरा शुरू हो जाती है।

अनुष्ठानों का क्रम

  • शुक्रवार – जगर, मातृ स्नान
  • शनिवार – सेमी पंडुम, पीड़ा विदानी, नेवता
  • रविवार – श्रृंगार धुलाई, कपड़ों की धुलाई
  • सोमवार – माता का श्रृंगार एवं पूजन, मेला प्रारंभ

मंगलवार – देवताओं का मेल-मिलाप, बलि एवं देवी-देवताओं की विदाई

माता पुजारी सुखनाथ भोयर, पेरमा राम धुर्वा, दलसाय मांझी, जालंधर राना, मंगलाराम साहनी, रजैया कक्केम और रमेश धुर्वा ने बताया कि कोदई माता मेले के साथ ही महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के पल्लीगांव में भी उसी दिन मेला लगता है। पल्लीगांव की पल्लिकारीन माता और कोदई माता को बहनें माना जाता है। इसी कारण वहां से भी बड़ी संख्या में आदिवासी श्रद्धालु जैतालुर पहुंचते हैं।

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