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बीजापुर में हल्बा समाज ने मनाया अमर शहीद गैंदसिंह नायक बलिदान दिवस

बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन

बीजापुर(हिन्दसत्)। हल्बा समाज बीजापुर द्वारा अमर शहीद गैंदसिंह नायक के बलिदान दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित बीजा हल्बा समाज भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के बच्चों के लिए निबंध, चित्रकला, फैंसी ड्रेस, रंगोली एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम प्रमुख एवं समाज प्रमुख मेघनाथ मांझी रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय हल्बा समाज छत्तीसगढ़ के केंद्र सचिव सत्यजीत राणा उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने अमर शहीद गैंदसिंह नायक के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सत्यजीत राणा ने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान आदिवासियों पर अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए थे। ऐसे समय में गैंदसिंह नायक आदिवासियों के बीच एक सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे। उन्होंने कम समय में ही एक संगठित विद्रोही संगठन तैयार किया और “अंग्रेज मुक्त बस्तर” का नारा देकर अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत की। अंततः 20 जनवरी 1825 को परलकोट महल के सामने अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दे दी, और वे स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद बन गए।

मुख्य अतिथि मेघनाथ मांझी ने कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम, चित्रकला, लोकगीत और वेशभूषा हमारी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था का जीवंत परिचय कराते हैं। पूर्वजों से मिली इस विरासत को सहेजते हुए समाज को संगठित और मजबूत बनाना ही आज की आवश्यकता है।

प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे:
  • चित्रकला प्रतियोगिता: प्रथम – कु. दिंपि मांझी, द्वितीय – कु. विरानी राणा, तृतीय – कु. भाविका मांझी
  • फैंसी ड्रेस: प्रथम – कु. लक्षेता राणा एवं प्रियंती बाकड़े
  • रंगोली: प्रथम – कु. मंजू मांझी रही।

कार्यक्रम का संचालन सुंदर पुजारी ने किया। आयोजन के संयोजक सोना धार मांझी एवं राजेंद्र राणा रहे। प्रतियोगिता पर्यवेक्षक के रूप में सतीश राणा एवं सरिता मांझी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में बीरेंद्र हिकमी (अध्यक्ष, कर्मचारी प्रकोष्ठ, हल्बा समाज छत्तीसगढ़, बीजापुर), धनेश्वरी बाकड़े (जनपद सदस्य, बीजापुर), हरीश मांझी (संभागीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष, 18 गढ़), शंकरलाल मांझी, रमेश मांझी, फूलचंद नायक सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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