कुचनूर कोरंडम खदान पर उठे सवालों के बाद खनिज विभाग ने दी सफाई

विधायक विक्रम मंडावी और सीपीआई नेता कमलेश झाड़ी ने ग्राम सभा और पेसा एक्ट के उल्लंघन का लगाया था आरोप
बीजापुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कुचनूर स्थित कोरंडम खदान को लेकर विधायक विक्रम मंडावी और सीपीआई नेता कमलेश झाड़ी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब खनिज विभाग ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।

जिला खनिज अधिकारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन खनिज साधन विभाग के आदेश दिनांक 02 फरवरी 2021 के तहत छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMDC) को तहसील भोपालपटनम अंतर्गत वनमंडल बीजापुर के कक्ष क्रमांक 560 (नया कक्ष क्रमांक 826) में स्थित 3.70 हेक्टेयर क्षेत्र में कोरंडम खनिज उत्खनन की स्वीकृति प्रदान की गई है।
जारी बयान में यह भी बताया गया कि ग्राम पंचायत रुद्रारम एवं जनपद पंचायत भोपालपटनम के प्रस्ताव दिनांक 25 मार्च 2011 के अनुसार खदान संचालन हेतु अनापत्ति प्रस्ताव सर्वसम्मति से जारी किया गया था।
5 हेक्टेयर से कम क्षेत्र होने पर जनसुनवाई आवश्यक नहीं – खनिज विभाग
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय नियमों के अनुसार 5.0 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र या क्लस्टर खदानों के लिए जनसुनवाई अनिवार्य होती है, जबकि कुचनूर खदान का क्षेत्र 5.0 हेक्टेयर से कम है और यह किसी भी क्लस्टर में शामिल नहीं है।
विभाग के अनुसार राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा EC Identification No. EC25C0108CG5605160N के तहत दिनांक 20 दिसंबर 2025 को EIA Notification 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत पर्यावरण स्वीकृति प्रदान की गई है।
जारी बयान में बताया गया कि यह स्वीकृति पत्र क्रमांक SEIAA/C.G./Mines/520996/2025 दिनांक 20.12.2025 के माध्यम से जारी की गई है। खदान क्षेत्र ग्राम कुचनूर में खसरा नंबर 826, रकबा 3.70 हेक्टेयर में स्थित है और इसके लिए 1.0 टन प्रतिवर्ष क्षमता की पर्यावरण स्वीकृति दी गई है।
विधायक मंडावी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की अनुमति और सहमति अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ग्राम सभा से परामर्श नहीं किया गया, न ही जनसुनवाई हुई और न ही पंचायतों को सूचित किया गया।
उन्होंने इसे पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम, पंचायत राज अधिनियम और संविधान की पांचवीं अनुसूची की भावना के खिलाफ बताते हुए गंभीर चिंता जताई।
खनिज विभाग ने प्रक्रिया को नियमों के तहत बताया
खनिज विभाग ने अपने पक्ष में कहा कि कुचनूर कोरंडम खदान को दी गई पर्यावरण स्वीकृति पूरी तरह नियमों और प्रक्रिया के तहत वैध है तथा आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के बाद ही स्वीकृति प्रदान की गई है।




