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तेन्दूपत्ता सीजन 2026 की तैयारी शुरू, बीजापुर जिले को 1.19 लाख मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य

बेहतर उत्पादन के लिए 5 से 15 मार्च तक चल रहा शाखकर्तन कार्य, ग्रामीणों से जंगलों में आग न लगाने की अपील

बीजापुर(हिन्दसत)। बस्तर का “हरा सोना” कहे जाने वाले तेन्दूपत्ता के बेहतर उत्पादन के लिए बीजापुर जिले में सीजन 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बीजापुर को इस वर्ष 1 लाख 19 हजार 500 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संग्रहण से पहले शाखकर्तन कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से 5 मार्च से 15 मार्च 2026 तक शाखकर्तन कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के प्रभावी संचालन के लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी निगरानी और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण प्रारंभ होने से लगभग 45 से 50 दिन पूर्व शाखकर्तन कराया जाना अधिक लाभकारी होता है, इसलिए इस कार्य के समय निर्धारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वन अधिकारियों ने बताया कि संग्रहण वर्ष 2026 के लिए समितिवार और फड़वार शाखकर्तन तथा संग्रहण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। जिन क्षेत्रों में शाखकर्तन किया जाना है, उनका मानचित्र भी पहले से तैयार कर लिया गया है ताकि कार्य पूर्ण होने के बाद उसका भौतिक सत्यापन किया जा सके।

फड़मुशी और फड़ अभिरक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें जंगलों में आग न लगाने के लिए जागरूक करें। महुआ या अन्य वनोपज संग्रहण के लिए जंगलों में आग लगाने से वन्यजीवों, वनस्पतियों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

वन विभाग ने बताया कि अधिक घनत्व वाली तेन्दूपत्ता झाड़ियों को जमीन की सतह से लगभग 1 से 2 इंच नीचे तेज धार वाले औजार से काटना चाहिए। शाखकर्तन के बाद अवशेषों को करीब एक मीटर दूर फेंकने की सलाह दी गई है, ताकि आग लगने की संभावना कम हो सके। इस वर्ष शाखकर्तन कार्य को विशेष अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिससे चयनित क्षेत्रों में सही समय और तकनीक के साथ कार्य कर भविष्य में संग्राहकों को अधिक लाभ मिल सके।

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