महुआ बीन रही बच्ची तक पहुंचे कलेक्टर, नन्हें कदमों को दिलाई स्कूल की राह

दूरस्थ गांव के दौरे में कलेक्टर अमित कुमार ने बच्ची और उसके माता-पिता से की बातचीत, मौके पर ही स्कूल में दाखिले के दिए निर्देश
सुकमा (हिन्दसत)। बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्रशासन अब सीधे गांवों तक पहुंचकर प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में जिले के कलेक्टर अमित कुमार के दौरे के दौरान एक संवेदनशील पहल सामने आई, जब उन्होंने महुआ बीन रही एक बच्ची से मिलकर उसे शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।
गुरुवार को कलेक्टर मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे दूरस्थ गांवों के दौरे पर थे। इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे महुआ बीनती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। कलेक्टर ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और खेतों के बीच जाकर बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की। बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया। बातचीत में पता चला कि वह आर्थिक और पारिवारिक कारणों से स्कूल नहीं जा पा रही थी।

इसके बाद कलेक्टर मंगली के घर पहुंचे और उसके माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें बच्चों की शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। महुआ बीनने वाले हाथ जब कलम थामेंगे, तभी सुकमा का वास्तविक विकास संभव होगा।
कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते हुए मंगली के साथ-साथ एक अन्य बालक माड़वी देवा का भी नियमित रूप से स्कूल जाना सुनिश्चित करने तथा उन्हें आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए कहा। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे। प्रशासन की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।



