बीजापुर में 52 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

‘पूना मारगेम’ नीति से प्रभावित होकर लौटे मुख्यधारा में, ₹1.41 करोड़ के इनामी शामिल
बीजापुर(हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के अंतर्गत बीजापुर जिले में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े कुल 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इन कैडरों पर उनके पद और संगठनात्मक भूमिका के अनुसार कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिला और 31 पुरुष कैडर शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।

वरिष्ठ कैडरों ने भी छोड़ा हिंसा का रास्ता
आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें DVCM, PPCM, ACM, डिवीजन और ब्यूरो पार्टी सदस्य, प्लाटून व एरिया कमेटी सदस्य, मिलिशिया कमांडर, पीएलजीए सदस्य तथा जनताना सरकार से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।
ये कैडर मुख्य रूप से DKSZC, AOB डिवीजन और भामरागढ़ एरिया कमेटी से संबंधित रहे हैं।
2024 से अब तक बीजापुर में बड़ी उपलब्धि
पुलिस विभाग द्वारा चलाए जा रहे माओवादी विरोधी अभियान के तहत
- 824 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
- 1126 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं
- 223 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
सुरक्षा बलों की रणनीति और भरोसे का असर
यह सफलता डीआरजी, बस्तर फाइटर, जिला बल, एसटीएफ, कोबरा बटालियन और केरिपु बल के समन्वित अभियान का परिणाम मानी जा रही है। लगातार चलाए गए संपर्क अभियान, संवाद, भरोसा निर्माण और संवेदनशील व्यवहार ने कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
प्रत्येक आत्मसमर्पित को ₹50,000 की सहायता
राज्य शासन की नीति के तहत प्रत्येक आत्मसमर्पित कैडर को ₹50,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी गई है। साथ ही इनके पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक पुनर्समावेशन की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस ने जारी की अपील
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने अपील करते कहा कि “माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधारा को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें। शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति हर व्यक्ति को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है।”


