पोटाकेबिनों में राशन घोटाला, मासूमों के निवाले पर गिद्ध दृष्टि

फर्जी उपस्थिति दिखाकर निकाली गई भोजन-राशन राशि, 4 प्रभारी अधीक्षक निलंबित
बीजापुर(हिन्दसत)। जिले के सुदूर वनांचलों में संचालित पोटाकेबिनों (आवासीय विद्यालयों) में बड़े राशन एवं मेस शुल्क घोटाले का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन आदिवासी बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए शासन द्वारा राशि जारी की जाती है, वह बच्चों तक पहुंचने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

कलेक्टर बीजापुर की अनुशंसा पर गठित जांच समिति जब विभिन्न पोटाकेबिनों में पहुंची तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कागजों में बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत दर्ज थी, लेकिन मौके पर आधे बच्चे भी उपस्थित नहीं मिले। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित थे, फिर भी उनके नाम पर राशन, सब्जी और मेस शुल्क की राशि लगातार सरकारी खजाने से निकाली जाती रही।
जांच में यह भी पाया गया कि घोटाले को छिपाने के लिए हाजिरी रजिस्टर में काट-छांट और हेरफेर किया गया। कई जगह उपस्थिति में फर्जी प्रविष्टियां कर वित्तीय आहरण को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। नियमों के अनुसार मासिक मेस गणना चार्ट बनाना जरूरी है, लेकिन बिना चार्ट के भी राशि निकाली गई। छात्रवृत्ति मद में भी अनियमितता के संकेत मिले हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा ने चार प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधीक्षकों में आदित्य ठाकुर, लक्ष्मीनारायण ओढदल, पुष्पलता सोनी और रघुनंदन मौर्य शामिल हैं। प्रशासन ने आगे भी कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।


