मंत्री के आदेश पर विभागीय ‘ब्रेक’? बीजापुर पशुपालन विभाग में 20 साल से जमे अधिकारी को अब तक नहीं किया गया कार्यमुक्त
मंत्री की चेतावनी के 23 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, उपसंचालक बोले- उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रोका गया है कार्यमुक्ति आदेश

बीजापुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ शासन के प्रशासनिक कसाव और सुशासन के दावों के बीच बीजापुर के पशुधन विकास विभाग का एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश के बावजूद सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एवीएफओ) नरोत्तम समरथ को अब तक कार्यमुक्त नहीं किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नरोत्तम समरथ पिछले लगभग 30 वर्षों से बीजापुर जिले में पदस्थ हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें पिछले करीब 20 वर्षों से उनके मूल दायित्वों से अलग रखते हुए उपसंचालक कार्यालय की भंडार शाखा में संलग्न रखा गया है। मामले को लेकर विभागीय मंत्री रामविचार नेताम को शिकायत सौंपे जाने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए थे। साथ ही आदेश के पालन में लापरवाही बरते जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मंत्री के निर्देश जारी होने के 23 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भंडार शाखा में लंबे समय से पदस्थ रहने के दौरान दवा खरीदी और डीएमएफ मद से जुड़े कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस संबंध में उपसंचालक डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार संबंधित कर्मचारी को फिलहाल कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग को जो निर्देश प्राप्त हुए हैं, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है।
मामले को लेकर अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय स्तर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है और मंत्री के निर्देशों के अनुपालन को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।

