आरटीआई का मखौल: निजी स्कूलों ने जानकारी देने से किया इनकार, जिला शिक्षा अधिकारी के पत्र पर भी नहीं दिया जवाब

मान्यता, आधारभूत सुविधाएं और 25% आरटीई प्रवेश की मांगी गई थी जानकारी
बीजापुर (हिन्दसत)। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर जिले में अजीब स्थिति सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निजी विद्यालयों से जानकारी मांगे जाने के बावजूद निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन ने जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे आरटीआई कानून का खुला मखौल उड़ता नजर आ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जिले के समस्त अशासकीय विद्यालयों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी, बीजापुर ने 12 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर सभी निजी विद्यालयों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने पत्र में विद्यालय भवन की स्थिति, कुल कक्षाओं की संख्या, स्वीकृत एवं वास्तविक छात्र संख्या, खेल मैदान की उपलब्धता, शौचालय, पेयजल सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की जानकारी मांगी थी। इसके अलावा निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की वास्तविक स्थिति और शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया था।
हालांकि इसके जवाब में निजी विद्यालय प्रबंधन एसोसिएशन ने 23 मार्च 2026 को पत्र भेजकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि आरटीआई अधिनियम निजी स्ववित्तपोषित विद्यालयों पर लागू नहीं होता, इसलिए कोई दस्तावेज उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के नियंत्रण में संचालित और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय यदि जानकारी देने से इनकार करते हैं, तो पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी। वहीं, आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी पर इस तरह का रुख अपनाए जाने से अधिनियम की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
मामले में अब द्वितीय अपील की तैयारी की जा रही है, जिससे राज्य सूचना आयोग से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रणाधीन निजी संस्थाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है और सूचना से इनकार करना नियमों के विपरीत है।


