कोया पुनेम कार्यशाला का समापन, परंपरा-संस्कृति और संवैधानिक जागरूकता पर जोर

पांच दिवसीय प्रशिक्षण में 350 प्रतिभागी हुए शामिल, युवा पीढ़ी को मूल पहचान से जोड़ने की अपील
बीजापुर(हिन्दसत)। मुसालूर चौक स्थित गोंडवाना भवन में आयोजित पांच दिवसीय कोया पुनेम संवैधानिक कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। 22 अप्रैल से 26 अप्रैल तक आयोजित इस कार्यशाला में जिले भर से करीब 350 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था, संस्कृति और जीवन दर्शन को समझने के साथ-साथ युवाओं को अपनी मूल पहचान से जोड़ना रहा।

कार्यशाला के दौरान केबीकेएस (कोया बूमकाल क्रांति सेना) कांकेर के प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को पारंपरिक सामाजिक संरचना, प्रकृति आधारित जीवन शैली, संगठनात्मक व्यवस्था और सामुदायिक जीवन मूल्यों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में पारंपरिक त्योहारों, बोली-भाषा, सामाजिक रीति-रिवाजों और समुदाय आधारित निर्णय प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही पेसा कानून, रूढ़िजन्य पारंपरिक ग्राम सभा की भूमिका तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।

गोंडवाना समन्वय समिति के बीजापुर जिला अध्यक्ष अमित कोरसा ने कहा कि कोया पुनेम आदिवासी समाज की संपूर्ण जीवन पद्धति है, जिसमें प्रकृति संरक्षण, सामूहिकता, समानता और पारंपरिक न्याय व्यवस्था जैसे मूल तत्व शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी है, ताकि सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।

समापन कार्यक्रम में बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने अनुशासन और सीखने की जो भावना दिखाई है, वह समाज को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोया पुनेम, संवैधानिक जागरूकता, रोजगार के अवसर, जल-जंगल-जमीन और पेसा कानून को लेकर जागरूकता आवश्यक है। इस प्रशिक्षण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आयोजन समिति से जनप्रतिनिधियों के लिए भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण में अश्विनी कांगे, नारायण मरकाम, संदीप सलाम, जगत मरकाम, विष्णु देव पदा, धन्नू सलाम, ललित होड़ी, तुलसी ठाकुर और अंबिका कचलामे ने प्रशिक्षण दिया। वहीं कुमारी मावली बस्तर बूमकाल दल ने लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को परंपरागत मूल्यों से अवगत कराया।
समापन अवसर पर सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी, अशोक तालांडी, धीरज राना, तुलसी मांडवी, कामेश्वर दुब्बा, कुंवर सिंह मज्जी, लालू राठौर, नरेंद्र बुरका, वाल्वा मदनैया, मरपल्ली किस्टैया, कमलेश पैंकरा, शिव पुनेम, बी. नागेश, वीरैया धुर्वा, जितेंद्र कुमार वट्टी, पांडुराम तेलाम सहित बस्तर संभाग के सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे।



