विश्व आदिवासी दिवस पर बोले विधायक विक्रम मंडावी— “शिक्षा और जागरूकता से ही सुरक्षित रहेंगे समाज के अधिकार”
राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन, पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, नक्सल मामलों बंद लोगों की रिहाई और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा सहित कई मांगें उठीं

बीजापुर (हिन्दसत)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय बीजापुर के मिनी स्टेडियम में आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों का भव्य संगम देखने को मिला। जिलेभर से पहुंचे हजारों आदिवासी समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों की मौजूदगी में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल श्री रमन डेका तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम संयुक्त ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से एसडीएम जागेश्वर कौशल को सौंपा गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि “आदिवासी समाज के अधिकार संविधान में सुरक्षित हैं, लेकिन उन्हें प्राप्त करने और संरक्षित रखने के लिए शिक्षा, जागरूकता और संगठन सबसे बड़ी ताकत है। समाज जितना शिक्षित और संगठित होगा, उसके अधिकार उतने ही मजबूत होंगे।”

ज्ञापन में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, स्वशासन, सामाजिक न्याय, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। समाज प्रमुखों ने पृथक आदिवासी धर्म कोड लागू करने, परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखने, अनुसूचित क्षेत्रों में निजीकरण पर रोक लगाने, आदिवासी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की।

इसके अलावा नक्सल मामलों में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासी युवाओं की रिहाई, वन अधिकार कानून के पूर्ण क्रियान्वयन, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण एवं खनन परियोजनाओं पर रोक तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) निधि के प्रभावी उपयोग की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

जिला स्तरीय मांगों में कुटरू और गंगालूर को विकासखंड का दर्जा देने, पोटाकेबिन संस्थाओं में नियमित स्टाफ व्यवस्था लागू करने, लाल पानी की समस्या से प्रभावित किसानों को राहत एवं मुआवजा प्रदान करने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग प्रमुख रही। समाज प्रमुखों ने कहा कि आदिवासी समुदाय की अस्मिता, परंपरागत अधिकारों और स्वशासन की रक्षा के लिए सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ठोस कदम उठाने चाहिए।

कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी पुरखों के सम्मान में पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण से हुई। इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
बाद में विशाल रैली निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थल पहुंची। यहां माल्यार्पण कर सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों के लिए उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। रैली में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज प्रमुख शामिल हुए।
आमसभा को संबोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन समाज की शक्ति उसकी जागरूकता और एकता में निहित होती है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। सभा को वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.आर. पुजारी, विशेष वक्ता तुलसी ठाकुर, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी, अशोक तलांडी, कैलाश रामटेके तथा नीना रावतिया उद्दे सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने आदिवासी संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और संवैधानिक अधिकारों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने सहभागिता निभाई। विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव, भाईचारे और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।


