सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, वन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
मवेशी के शिकार के बाद बढ़ाई गई निगरानी, कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात

सुकमा (हिंदसत)। सुकमा वन परिक्षेत्र में बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। बुधवार को एक मवेशी के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन विभाग, पुलिस और पशु चिकित्सकों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मौके से बाघ के संभावित पदचिह्न मिलने के बाद क्षेत्र में बाघ की आवाजाही की आशंका जताई जा रही है।

वन विभाग के अनुसार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की निर्धारित मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) के तहत निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में वन अमले की तैनाती की गई है, ग्रामीणों को मुनादी के माध्यम से सतर्क किया जा रहा है तथा कैमरा ट्रैप लगाकर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
वन अधिकारियों ने बताया कि कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी, केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों से शाम के बाद जंगल में अकेले न जाने, बाघ दिखाई देने पर उसके पास न जाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की अपील की गई है।

वन विभाग ने लोगों से सोशल मीडिया पर अपुष्ट फोटो, वीडियो या अफवाहें प्रसारित नहीं करने और केवल प्रशासन एवं वन विभाग की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने का आग्रह किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में मवेशी के बाघ द्वारा मारे जाने की पुष्टि होती है तो पात्र पशुपालक को शासन के नियमों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
वन अधिकारियों ने यह भी बताया कि बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 का संरक्षित वन्यजीव है। इसके शिकार, हत्या या नुकसान पहुंचाने का प्रयास कानूनन दंडनीय अपराध है। विभाग ने कहा कि ग्रामीण घबराएं नहीं, सतर्क रहें और किसी भी सूचना की तत्काल जानकारी वन विभाग को दें।


