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कागज़ों में स्कूल, मान्यता असली

बीजापुर में निजी स्कूलों की मान्यता पर बड़ा सवाल, RTI में खुली व्यवस्थाओं की पोल

बीजापुर (हिन्दसत)। जिले में संचालित कुछ निजी शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निरीक्षण व्यवस्था संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि कई निजी स्कूलों ने मान्यता और नवीनीकरण के लिए दिए गए आवेदन में अध्यापन कक्ष, शौचालय, कार्यालय, खेल मैदान, लाइब्रेरी तथा फायर सेफ्टी एनओसी जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में भ्रामक और बोगस जानकारी प्रस्तुत की।

सबसे हैरान करने वाला मामला एक ऐसे निजी स्कूल का सामने आया है, जो कथित तौर पर एक हॉलनुमा धर्मशाला भवन में संचालित हो रहा है, लेकिन दस्तावेजों में उसने निर्धारित मानकों के अनुरूप कई अध्यापन कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय और खेल मैदान होने का दावा किया है। RTI से प्राप्त जानकारी में भवन क्षेत्रफल और वास्तविक व्यवस्थाओं के बीच भारी अंतर सामने आने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार कुछ संस्थानों ने आवेदन पत्रों में दर्जनों अध्यापन कक्ष दर्शाए, जबकि मौके पर पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। कई स्थानों पर शौचालय व्यवस्था अधूरी बताई जा रही है, वहीं खेल मैदान और पुस्तकालय केवल दस्तावेजों तक सीमित होने के आरोप हैं। फायर सेफ्टी एनओसी को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इधर इस शाला प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष कुंवर सिंह मज्जी ने बताया कि काफी समय पहले एक समिति का गठन तो किया गया था, लेकिन गठन के बाद आज तक समिति की एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धर्मशाला में शिक्षण संस्था संचालन के लिए प्रस्तुत नोटरीकृत दस्तावेज वर्ष 2013 के हैं, जबकि नियमानुसार ऐसे दस्तावेजों का प्रतिवर्ष नवीनीकरण आवश्यक होता है। इसके बावजूद वर्षों पुराने दस्तावेजों के आधार पर संस्था संचालन जारी रहने पर अब सवाल उठने लगे हैं।

बिना स्थल निरीक्षण के मिली मान्यता?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शिक्षा विभाग ने इन संस्थानों को मान्यता अथवा नवीनीकरण किस आधार पर दिया। यदि दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में इतना बड़ा अंतर है, तो क्या विभागीय अधिकारियों ने स्थल परीक्षण और शाला निरीक्षण किए बिना ही फाइलों में मान्यता जारी कर दी?

जानकारों का कहना है कि निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए निर्धारित मापदंडों में भवन सुरक्षा, पर्याप्त कक्ष, स्वच्छ शौचालय, खेल मैदान, पुस्तकालय और अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र अनिवार्य हैं। इसके बावजूद कथित कमियों वाले संस्थानों को अनुमति मिलना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है।

कार्रवाई नहीं होने पर उठ रहे सवाल

RTI से खुलासे के बाद भी अब तक संबंधित संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों पर दबाव या मिलीभगत के कारण नियमों की अनदेखी की जा रही है।

अभिभावकों ने मांग की है कि जिले में संचालित सभी निजी विद्यालयों का संयुक्त टीम द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा फर्जी जानकारी देकर मान्यता लेने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा गुणवत्ता पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरी सुविधाओं वाले भवनों में स्कूल संचालन न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। फायर सेफ्टी और भवन मानकों की अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देती नजर आ रही है।

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