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नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर को उजाड़ने की योजनाएं बनाई जा रही – नेता प्रतिपक्ष महंत

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का भैरमगढ़ में भव्य स्वागत, कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा पर साधा निशाना

बीजापुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का भैरमगढ़ आगमन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। स्वागत का दौर बीजापुर जिले के प्रवेश द्वार नेलसनार से शुरू होकर भैरमगढ़ स्थित विधायक निवास तक जारी रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, जगदलपुर विधायक लखेश्वर बघेल, पूर्व विधायक देवती कर्मा, पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, मलकीत सिंह गैदु सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल हुए। विधायक निवास परिसर में आयोजित बैठक की शुरुआत जिला कांग्रेस अध्यक्ष लालू राठौर के स्वागत संबोधन से हुई।

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि इस सम्मेलन से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और संगठन को मजबूती मिलेगी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार सरकार की विफलताओं को जनता तक पहुंचाने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के ढाई वर्ष बीत चुके हैं और कांग्रेस आगामी चुनावों में बस्तर की सभी 12 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।

दीपक बैज ने आदिवासी हितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आदिवासियों को तेंदूपत्ता तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि खनिज उत्खनन की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा आज सबसे बड़ी चुनौती है और कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेगी।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर को शांति, प्रेम और भाईचारे की भूमि के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह क्षेत्र लंबे समय से संघर्ष और पीड़ा का भी साक्षी रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संदेश के अनुरूप पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता आदिवासियों, महिलाओं, किसानों और युवाओं की समस्याओं में उनके साथ खड़ा रहेगा।

महंत ने आरोप लगाया कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर को उजाड़ने की योजनाएं बनाई जा रही हैं और आने वाले समय में क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने बोधघाट परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान हैं और इन्हें बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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