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जेल से षड्यंत्र? स्पाई-कैम, मोबाइल और हेडफोन… अमृतपाल के बैरक में पहुंची संदिग्ध चीजें; प्रशासन अलर्ट…

असम के डिब्रूगढ़ की सेंट्रल जेल में कैद वासिर पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह की बैरक से मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, सिम, कीपैड फोन बरामद हुए हैं।

असम पुलिस के डीजीपी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर तस्वीर के साथ किए एक पोस्ट में यह जानकारी दी।

पुलिस महानिदेशक के मुताबिक, अमृतपाल के बैरक में संदिग्ध गतिविधियां होने की सूचना मिलने पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

इन संदिग्ध वस्तुओं के बरामद होने के बाद शक की सुई इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि क्या अमृतपाल किसी तरह का कोई षड्यंत्र रच रहा था? 

असम के डीजीपी जीपी सिंह ने पोस्ट में लिखा कि एनएसए सेल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने पर एनएसए ब्लॉक के सार्वजनिक क्षेत्र में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।

प्राप्त इनपुट की पुष्टि की गई संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर जेल कर्मचारियों ने आज सुबह एनएसए सेल के परिसर की तलाशी ली, जिससे सिम के साथ एक स्मार्टफोन, एक कीपैड फोन, कीबोर्ड के साथ टीवी रिमोट, स्पाई-कैम पेन, पेन ड्राइव, ब्लूटूथ हेडफोन और स्पीकर और स्मार्ट घड़ी बरामद हुए।

इन्हें जेल कर्मचारियों द्वारा जब्त कर लिया गया है। इन संदिग्ध वस्तुओं के स्रोत और भेजे जाने के तरीके का पता लगाया जा रहा है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

वकील बोले- एनएसए खत्म होने पर अमृतपाल को ब्लैकमेल करने के लिए किया ऐसा
इस बीच अमृतपाल सिंह व उसके साथियों की बैरक से उक्त सामान बरामद होने पर वकील ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए बाथरूम में कैमरे लगाए गए थे।

वकील ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें बताया गया है कि जेल में बंद अमृतपाल सिंह सहित 10 लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इनकी प्राइवेसी की फोटो व वीडियो ट्रांसपोर्ट हो रही है। उनकी नहाने तक की वीडियो फोटो ली जा रही है ताकि अगले महीने 18 तारीख को एनएसए खत्म होने पर अमृतपाल सिंह को ब्लैकमेल किया जा सके।

23 अप्रैल को मोगा के गांव से किया था गिरफ्तार
अजनाला थाने पर हमले के बाद पंजाब में माहौल खराब हो गया था। अमृतपाल को गिरफ्तार करने के लिए 18 मार्च को पूरे पंजाब में ऑपरेशन शुरू किया गया था।

अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। उसे व उसके सहयोगियों को उसी दिन उन्हें डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया गया था।

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