“सही दवा–शुद्ध आहार” अभियान शुरू, बीजापुर में खाद्य और दवाओं की गुणवत्ता पर हो रही सख्त निगरानी
15 दिवसीय सघन जांच, मिलावट रोकने और सुरक्षित खानपान को लेकर प्रशासन सक्रिय

बीजापुर (हिन्दसत)। जिले में आम नागरिकों को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री एवं दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “सही दवा–शुद्ध आहार–यही छत्तीसगढ़ का आधार” थीम पर 15 दिवसीय सघन जांच एवं जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस अभियान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है। अभियान का मुख्य उद्देश्य मिलावटी खाद्य पदार्थों की रोकथाम, असुरक्षित दवाओं की बिक्री पर नियंत्रण तथा स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में गठित टीम जिलेभर के बाजारों, होटल-ढाबों, जूस सेंटर, डेयरी दुकानों और फास्ट फूड प्रतिष्ठानों की लगातार जांच कर रही है। साथ ही दुकानदारों और आम नागरिकों को स्वच्छता, पौष्टिक आहार और सुरक्षित दवाओं के उपयोग के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को सुरक्षित खानपान और दवा उपयोग के प्रति जागरूक करना भी इसकी प्राथमिकता है।

अभियान की शुरुआत 27 अप्रैल 2026 से की गई। प्रारंभिक दो दिनों में टीम ने इंदिरा मार्केट, नया बस स्टैंड और मेन रोड क्षेत्र में गन्ना जूस सेंटर, लस्सी दुकान, मोमोज सेंटर, चाट ठेले, एग रोल सेंटर, छोटे होटल, फास्ट फूड सेंटर, फल दुकानों तथा डेयरी प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण, साफ-सफाई की स्थिति, पानी की गुणवत्ता, उपयोग किए जा रहे बर्तनों की स्वच्छता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की गई।
जांच के दौरान कई दुकानों में खाद्य सामग्री खुली रखने, अस्वच्छ बर्तनों का उपयोग, गंदे पानी से धुलाई, अखबार या प्रिंटेड पेपर में खाद्य सामग्री परोसने जैसी कमियां पाई गईं। टीम ने दुकानदारों को तत्काल सुधार करने के निर्देश देते हुए खाद्य सामग्री को ढककर रखने, स्वच्छ पानी का उपयोग करने, दस्ताने एवं एप्रन पहनने, खराब या बासी खाद्य पदार्थों को हटाने तथा साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि अखबार या प्रिंटेड पेपर में खाद्य पदार्थ परोसना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, क्योंकि प्रिंटिंग इंक में मौजूद रसायन भोजन में मिलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा खुले में रखे खाद्य पदार्थों में धूल, मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से पहुंचते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, दस्त, उल्टी और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
जिन व्यापारियों के पास खाद्य पंजीयन या लाइसेंस नहीं पाया गया, उन्हें तत्काल पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीयन खाद्य सामग्री का विक्रय नियमों के विरुद्ध है और अभियान के दौरान उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अभियान के दौरान दवा दुकानों की भी जांच की जाएगी, जिसमें एक्सपायरी दवाओं की बिक्री, बिना डॉक्टर के पर्चे की प्रतिबंधित दवाएं, दवाओं के भंडारण की स्थिति तथा बिलिंग व्यवस्था की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि दवा खरीदते समय बिल अवश्य लें, एक्सपायरी डेट जांचें और बिना सलाह के दवा का सेवन न करें।
प्रशासन ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे केवल साफ-सुथरे प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें, खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें, संदिग्ध गुणवत्ता की खाद्य सामग्री या दवा मिलने पर संबंधित विभाग को सूचना दें। अभियान आगामी दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।




