बस्तर में एनआईए की विशेष अदालत शुरू, नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई को मिलेगी रफ्तार
झीरम, भीमा मंडावी हत्याकांड समेत 21 महत्वपूर्ण प्रकरणों की होगी स्थानीय स्तर पर सुनवाई, संगीता नवीन तिवारी बनीं विशेष न्यायाधीश

जगदलपुर (हिन्दसत)। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चल रहे अभियान के बीच न्यायिक मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और राज्य सरकार की सिफारिश पर जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अदालत के संचालन के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीश संगीता नवीन तिवारी को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर और कोंडागांव जिलों से जुड़े एनआईए मामलों की सुनवाई अब स्थानीय स्तर पर की जा सकेगी। इससे वर्षों से लंबित राष्ट्रीय सुरक्षा और नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में इन चार जिलों से जुड़े एनआईए के 21 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, जबकि करीब 110 मामले विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। विशेष अदालत के गठन के बाद इन मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और गति के साथ हो सकेगी।
बस्तर में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही हैं। वर्ष 2013 का झीरम घाटी हमला, दंतेवाड़ा के तत्कालीन भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या तथा नारायणपुर में भाजपा नेता की हत्या जैसे चर्चित मामलों की जांच एनआईए द्वारा की गई थी। इन प्रकरणों सहित कुल 12 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई अब विशेष अदालत में होगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य सरकार ने अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शुक्ला और दिनेश पाणिग्राही की नियुक्ति की है, जबकि आरोपियों के पक्ष में भी अधिवक्ताओं की व्यवस्था की गई है।
विधि विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए की विशेष अदालत शुरू होने से नक्सल हिंसा से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

