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झारखंड में सक्रिय 8 माओवादी कैडरों ने बीजापुर में किया आत्मसमर्पण, 49 लाख के इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और कमजोर पड़ते संगठन के बीच आत्मसमर्पण को बड़ी सफलता माना जा रहा

बीजापुर (हिन्दसत)। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर झारखंड राज्य में सक्रिय 8 माओवादी कैडरों ने झारखंड पुलिस एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सहयोग से बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 5 महिला सहित कुल 8 माओवादी कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल 49 लाख रूपए का इनाम घोषित था।

पुलिस के अनुसार सभी कैडर लंबे समय से प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े होकर झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे। सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव, संगठन की लगातार कमजोर होती स्थिति, हिंसक एवं जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग, पूर्व माओवादियों के सफल पुनर्वास तथा आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

आत्मसमर्पण करने वालों में दक्षिण जोनल कमेटी और सरांडा सब जोनल कमेटी से जुड़े डीवीसीएम स्तर के कैडर अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत शामिल हैं। इनके अलावा कोल्हान एरिया कमेटी की सदस्य फगनी पोयाम उर्फ रजनी, सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी, हिड़मे कड़ती उर्फ रीता, बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा तथा सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी ने भी आत्मसमर्पण किया है।

विशेष रूप से सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी को सीसी सदस्य मिसिर बेसरा का सुरक्षा गार्ड बताया गया है। यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है जब झारखंड में शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी की खबरों ने संगठन को बड़ा झटका दिया है।

संगठन पर बढ़ा दबाव

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हाल के महीनों में बस्तर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण, मुठभेड़ों में वरिष्ठ माओवादी कैडरों के मारे जाने तथा लगातार चल रहे अभियानों से संगठन की पकड़ कमजोर हुई है। झारखंड और बस्तर में एक साथ सामने आए घटनाक्रमों को माओवादी संगठन के लिए बड़ा रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

पुनर्वास की मिलेगी सुविधा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार एवं रोजगार संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा इनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए निरंतर सहयोग भी दिया जाएगा।

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