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बीजापुर का बहुप्रतीक्षित आम महोत्सव, स्थानीय किसानों को इस वर्ष भी इंतजार

“यहां हर आम है खास” थीम पर 2024 में पहली बार हुआ था आयोजन, 54 से अधिक किस्मों के आमों ने बटोरी थी सुर्खियां

बीजापुर (हिन्दसत)। बीजापुर जिले की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य, वन संपदा और आदिवासी संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की धरती पर पैदा होने वाली दुर्लभ और स्वादिष्ट आम की प्रजातियां भी जिले को विशेष पहचान दिलाती हैं। वर्ष 2024 में जिला प्रशासन द्वारा पहली बार आयोजित “बीजापुर आम महोत्सव” ने न केवल स्थानीय किसानों को मंच प्रदान किया था बल्कि जिले की कृषि और बागवानी संभावनाओं को भी नई पहचान दी थी। हालांकि इसके बाद बीते वर्ष यह आयोजन नहीं हो सका, जिससे किसानों और आम प्रेमियों में निराशा देखने को मिली।

जून का महीना आते ही जिले में आम का मौसम अपने चरम पर होता है। ऐसे समय में किसानों और आम उत्पादकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस वर्ष फिर से आम महोत्सव का आयोजन कर इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि किसानों की मेहनत, स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार और जिले की सकारात्मक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम है।

वर्ष 2024 में आयोजित पहले आम महोत्सव में जिले के किसानों ने 54 से अधिक किस्मों के आमों की प्रदर्शनी लगाई थी। महिलाओं ने आम से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रदर्शनी प्रस्तुत की थी, वहीं स्कूली विद्यार्थियों ने चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई थी। कार्यक्रम में जिले के प्रसिद्ध हाथी झूल आम ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई थी।

कृषि और उद्यानिकी से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजन किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, आम की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीजापुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में जहां बड़ी संख्या में किसान आम उत्पादन से जुड़े हैं, वहां आम महोत्सव उनके लिए प्रोत्साहन का बड़ा मंच साबित हो सकता है।

स्थानीय किसानों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस वर्ष आम महोत्सव का आयोजन पूर्व की तुलना में और बड़े स्तर पर किया जाए ताकि बीजापुर के आमों को राष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ-साथ किसानों को भी आर्थिक लाभ मिल सके।

अब जिले की निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या “यहां हर आम है खास” की थीम पर शुरू हुआ यह अनूठा महोत्सव फिर से लौटेगा या स्थानीय किसानों को एक और वर्ष इंतजार करना पड़ेगा।

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