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सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक दीपक कुमार का बीजापुर दौरा, संवेदनशील कैंपों में जवानों का बढ़ाया मनोबल

नैशनल पार्क क्षेत्र के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस का किया निरीक्षण, नक्सल उन्मूलन अभियानों की सराहना

बीजापुर (हिन्दसत)। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के विशेष महानिदेशक, मध्य अंचल, दीपक कुमार (आईपीएस) ने अपने बीजापुर प्रवास के दूसरे दिन नैशनल पार्क क्षेत्र के संवेदनशील सुरक्षा कैंपों का दौरा कर जवानों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बीजापुर रेंज के डीआईजी बी.एस. नेगी, कमांडेंट अरविंद कुमार तथा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

दीपक कुमार ने नेशनल पार्क क्षेत्र के उल्लूर घाटी, चिल्लामार्का, कांडलापरती-1 और कांडलापरती-2 स्थित फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) का निरीक्षण किया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में स्थापित इन कैंपों से संचालित सफल अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में सक्रिय माओवादी कमांडरों और संगठन को कमजोर करने में इन एफओबी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचना होगा। उन्होंने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादियों के प्रति सम्मानजनक और सहयोगात्मक व्यवहार बनाए रखने पर भी जोर दिया, ताकि वे दोबारा भटकाव का शिकार न हों।

संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता

संगमपल्ली कैंप में आयोजित ‘बड़ा खाना’ कार्यक्रम के दौरान 22वीं वाहिनी, 62वीं बटालियन, 208 कोबरा, 241वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के अधिकारियों एवं जवानों को संबोधित करते हुए दीपक कुमार ने कहा कि सुरक्षा बलों और विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय तथा संयुक्त प्रयासों से ही कठिन लक्ष्य हासिल किए जा सके हैं। उन्होंने आगे भी इसी सहयोग और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

170वीं बटालियन मुख्यालय में किया वृक्षारोपण

सायंकाल दीपक कुमार ने 170वीं बटालियन मुख्यालय का दौरा किया, जहां कमांडेंट सरकार राजा रमन ने अस्पताल, कोत, स्टोर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कराया। जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर बल दिया तथा परिसर में वृक्षारोपण भी किया।

विशेष महानिदेशक का यह दौरा जवानों और अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक रहा। उनकी सहजता और आत्मीय संवाद शैली ने सुरक्षा बलों के जवानों का मनोबल बढ़ाने का काम किया।

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