मध्यप्रदेश

महाकाल को राखी बांधकर मनाया रक्षाबंधन पर्व, चढ़ाए सवा लाख लड्डू

Raksha Bandhan: भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन बुधवार को मनाया जा रहा। हालांकि इस बार दो पूर्णिमा तिथि होने से असमंजस भी है। लेकिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन पर्व पर भी अनूठी परंपरा निभाई जाती है। यहां पर पंडित और पुरोहित परिवार द्वारा बाबा महाकाल को राखी बांधकर विश्व शांति और कल्याण की कामना की गई। बाबा महाकाल बिना किसी मुहूर्त के पहले राखी बांधी। अब देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार गुरुवार को पूर्णिमा तिथि प्रात: तक ही होने के कारण राखी बुधवार को ही बांधी जानी चाहिए।

प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के दरबार में सावन महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसका समापन रक्षाबंधन पर्व पर होता है। बुधवार को भगवान महाकाल के दरबार में कपाट खुलने के बाद भगवान का जल, दूध, इत्र, फलों के रस से अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल को सुख में और भांग से श्रृंगारित किया गया।

बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डूओं का लगाया भोग

बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्म आरती हुई, जिसमें महान निर्माणी अखाड़े के साधु संतों ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान को भस्म रमाई। इस दौरान बाबा महाकाल को लड्डुओं का भोग भी लगाया गया। पंडित यश गुरु ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं को लड्डू खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया जा रहा है। सवा लाख लड्डू के भोग की परंपरा कई वर्षों से लगातार चल रही है। रक्षाबंधन पर्व के साथ ही सावन मास समापन हो जाता है।

भगवान महाकाल के साथ मनाया रक्षाबंधन का पर्व

महिला श्रद्धालु ने बताया कि भगवान महाकाल के साथ रक्षाबंधन पर मनाने का सौभाग्य मिला। महाकालेश्वर मंदिर में जब भस्म आरती होती है तो ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत से भक्तों का आशीर्वाद दे रहे हैं। रक्षाबंधन के पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए आ रहे हैं। महाकालेश्वर मंदिर भगवान को रक्षा सूत्र भी चढ़ाया जाता है। रक्षाबंधन के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया था। भगवान को विशाल राखी भी बांधी गई। यह दृश्य अपने आप में अद्भुत था।

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि बुधवार सुबह 10.58 से लेकर अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 7.05 बजे तक रहेगी। लेकिन पूर्णिमा के उदय के साथ ही भद्रा भी लग जाएगा। यह रात्रि 9 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। ऐसे में ज्योतिषाचार्यों का मत है कि राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ समय पहले दिन 30 अगस्त को रात 9.02 बजे बाद है।

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