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सेवा सुरक्षा, मानदेय और लंबित भुगतान को लेकर व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन

एक दिवसीय कलमबंद आंदोलन कर चेताया

बीजापुर (हिन्दसत)। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कौशल आधारित एवं रोजगारपरक शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। जिला व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के बैनर तले प्रशिक्षकों ने 17 अगस्त को एक दिवसीय ध्यानाकर्षण एवं कलमबंद आंदोलन कर जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

संघ के जिलाध्यक्ष चंदन देशमुख ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लगभग 1,285 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षक 15 विभिन्न ट्रेडों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशिक्षकों को न तो सेवा सुरक्षा प्राप्त है और न ही सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कई-कई महीनों तक वेतन लंबित रहने, कम मानदेय और अस्थिर सेवा शर्तों के कारण प्रशिक्षकों को आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशिक्षकों का आरोप है कि निर्धारित दायित्वों के अतिरिक्त उनसे कई गैर-व्यावसायिक कार्य भी कराए जाते हैं, जबकि सामान्य अवकाश, चिकित्सा अवकाश एवं मातृत्व अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। संघ ने समान कार्य के लिए समान वेतन की नीति लागू करने तथा व्यावसायिक प्रशिक्षकों को सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रमुख मांगें-

  • हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया जाए।
  • वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) की व्यवस्था लागू की जाए।
  • तृतीय पक्ष या कंपनी व्यवस्था समाप्त कर विभागीय समायोजन एवं सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
  • PAB 2025-26 के अंतर्गत लंबित 12 हजार रुपये एरियर्स का भुगतान किया जाए।
  • 1,029 प्रशिक्षकों के मई-जून के लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान हो।
  • हेल्थ केयर ट्रेड के 121 प्रशिक्षकों का 23 हजार रुपये मासिक मानदेय यथावत रखा जाए।
  • निष्कासित चार प्रशिक्षकों को पुनः सेवा में बहाल किया जाए।
  • 20 दिन के आकस्मिक, चिकित्सा एवं मातृत्व अवकाश की सुविधा प्रदान की जाए।
  • निर्धारित कार्यों के अलावा अन्य गैर-व्यावसायिक कार्य न कराए जाएं।
  • इंडस्ट्रियल विजिट, गेस्ट लेक्चर की लंबित राशि का भुगतान एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रदान किया जाए।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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