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पीआईबी तमिलनाडु की टीम ने जाना बदलते बस्तर की हकीकत

तिरंगे और विकास के भरोसे ने दिखाई बदलाव की तस्वीर, ग्रामीणों के बीच पहुंची पीआईबी

बीजापुर (हिन्दसत)। बस्तर की जमीनी हकीकत, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और विकास की बदलती तस्वीर से देश के अन्य हिस्सों के पत्रकारों को रूबरू कराने के उद्देश्य से पीआईबी तमिलनाडु की पत्रकारों की टीम बीजापुर पहुंची। टीम ने कलेक्टर विश्वदीप और पुलिस अधीक्षक उमेश गुप्ता के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर स्थानीय जीवनशैली, आदिवासी संस्कृति, शिक्षा और विकास कार्यों को करीब से जाना।

भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने ग्रामीणों से संवाद कर क्षेत्र में आए बदलावों को समझने का प्रयास किया। टीम ने गांवों में आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से देखा। शिक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ नई पीढ़ी में दिखाई दे रहे उत्साह को भी पत्रकारों ने महसूस किया।

ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान बच्चों के हाथों में तिरंगा और ग्रामीणों के बीच विकास को लेकर बढ़ता भरोसा बस्तर में हो रहे बदलाव की तस्वीर पेश करता नजर आया। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ने से लोगों के जीवन में आए बदलाव को पत्रकारों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।

कभी नक्सलवाद के साये के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर के कई इलाकों में अब शांति, शिक्षा और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। सुरक्षा के साथ प्रशासन और सरकार की विकास योजनाओं की पहुंच गांवों तक बढ़ने से ग्रामीणों में विश्वास मजबूत होने की बात भी सामने आई।

पीआईबी तमिलनाडु के डायरेक्टर पी. अरुण कुमार ने कहा कि पत्रकारों के लिए यह भ्रमण बस्तर को बाहर से देखने के बजाय यहां के लोगों के बीच जाकर समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। ग्रामीण जीवन, आदिवासी संस्कृति और क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को करीब से देखने से बस्तर की वास्तविक तस्वीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।

जगदलपुर पीआईबी अधिकारी बी. एस. ध्रुव ने भी भ्रमण के दौरान बस्तर की संस्कृति और विकास की तस्वीर को करीब से देखने के अनुभव साझा किए।

इस दौरान उप संचालक (जनसंपर्क) दिनेश नेताम तथा दूरदर्शन के संवाददाता के. संतोष कुमार भी मौजूद रहे।

पीआईबी तमिलनाडु की पत्रकार टीम के बीजापुर भ्रमण से बस्तर की वास्तविक तस्वीर, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और बदलते ग्रामीण जीवन को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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